Hindi Verses

दिल से दिल की बात नहीं,

यह रूहों का सवाल है

न हिज्र है न विसाल है

न पाने की ख्वाहिश, न खो देने का मलाल है  (FB 30.12.2017)

जिंदगी यूं ही साल-दर-साल गुजरती जाती है

फिर भी आने वाला साल

किसी मोजज़ा* की उम्मीद सा लगता है.  * Miracle (FB 21.12.2017)

क्यों ढूंढती रहती हैं यह आंखें तुझे खुदा

हद-ए- निगाह से दूर हो, यह जानता हूं मैं (FB 4.12.2017)

थाामा है तेरा दामन,

इबादत मेरी!

रस्ता तेरा, मन्जिल तेरी,

जिस हाल में भी रखे,

रहमत तेरी! (FB 6.10.2017)

ज़िन्दगी की आपा-धापी भी कितनी अजीब है

कोई अभी बिख़रे तिनके भी न समेट पाया

और कोई नए ठिकानों की तलाश में निकल गया  (FB  30.9.2017)

ख़्वाबों-ख़्यालों के

वजूद कहाँ होते हैं!

बस…….!

पानी के बुलबुले हैं

जोश में आते हैं

और दम तोड़ देते हैं (FB 24. 9. 2017)

अपने बन्दे पर मुस्सलसल* तेरी नज़र है, ए मौला

तो बढ़ के उसका हाथ, तू क्यूँं नहीं थाम लेता

*लगातार   (FB 10.8.2017)

उदास शामों का मौसम उतर आया

ग़मे-तन्हाई का फिर से ज़िकर आया

मैं रोज़  इधर से गुज़रता हूँ

जो बिछड़ा, पलट के न फिर आया  (FB 25.7.2017)

मुझे मालूम है तेरी आयतों में,

मैं कहीं नहीं हूँ ए मेरे मौला

मेरी सदायें भी कुछ बे-नाम सी हैं!

बस तूं है, और मैं हूँ

यही एहसास-ए खुशनुमा काफी है

राह-ए-सफ़र के लिए  (FB 25.1.2017)

यह आज का दिन, जो कल नहीं आनेवाला
चलो कुछ ऐसा करें, इसे यादगार बना दें  (FB 27.11.2016)

इतने गिले इतने शिकवे इतनी बद्गुमानियाँ इस ज़माने की

ए दिल तू यह सब जरता कैसे है

और अगर इतना ही पत्थर हो गया है

तो फिर धड़कता कैसे है

 

बहुत चाहूँ, कभी तो मैं भी तन्हा हो के देख लूँ
मुझे ये ज़हन मेरा क्यूँ अकेला छोड़ता नहीं (njk) May 24, 2016

 

 

कुछ वक़्त के परिंदे, जो हाथ में से छूटे

लाख चाहूँ भी तो, लगता नहीं के लौटें

यह किस मुकाम पर लाकर खड़ा किया है तूने ऐ खुदा

तुझे समझ नहीं पाता हूँ, खुद से अनजान हुआ जाता हूँ

जितने भी तीर हैं तरकश में, सब इक बार में ही चला दो

हर रोज़ एक नया जख्म बहुत तक़लीफ देता हैं

 

 

 

 

 

 

 

Posted in Uncategorized at February 20th, 2018. No Comments.